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Lakhisarai News: लखीसराय ROB के गर्डरों में दरारें, IIT पटना की जांच के बाद निर्माण कंपनी 15 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Lakhisarai News | लखीसराय बाइपास ROB की IIT पटना से हुई जांच में गर्डरों में दरारें, बेयरिंग और सरियों में जंग जैसी खामियां सामने आईं। पथ निर्माण विभाग ने निर्माण एजेंसी को 15 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया।

28 अक्टूबर 2026 | Alam Ki Khabar: बिहार के लखीसराय में बाइपास स्थित रेल ओवरब्रिज (ROB) की तकनीकी खामियों ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण पूरा होने के करीब छह साल बाद पुल के गर्डरों में दरारें, बेयरिंग में खराबी और सरियों में जंग जैसी समस्याएं सामने आईं। तकनीकी जांच के बाद पथ निर्माण विभाग ने निर्माण एजेंसी बाबा हंस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 15 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की है। अब इस पूरे मामले में पुल की सुरक्षा, मरम्मत और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।


तकनीकी जांच में सामने आईं कई गंभीर खामियां


लखीसराय बाइपास ROB की संरचनात्मक स्थिति का परीक्षण तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कराया गया था। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, जांच में पुल के कई गर्डरों में एक-दूसरे के नजदीक दरारें पाई गईं। इसके अलावा PTFE बेयरिंग में क्षरण और पुल को मजबूती देने के लिए इस्तेमाल किए गए सरियों में जंग लगने की समस्या भी सामने आई।


गर्डर पुल की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो ऊपर से गुजरने वाले वाहनों का भार सहन करने में मदद करता है। ऐसे हिस्सों में दरारें मिलने पर पुल की स्थिति का विस्तृत तकनीकी आकलन जरूरी होता है। बेयरिंग और सरियों में खराबी की जानकारी ने भी जांच की गंभीरता बढ़ा दी।


तकनीकी रिपोर्ट में इन खामियों को संरचनात्मक सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक बताया गया। रिपोर्ट के आधार पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित करने और आवश्यक मरम्मत व सुदृढ़ीकरण की जरूरत पर जोर दिया गया।


2020 में पूरा हुआ था निर्माण, छह साल में उठे सवाल


विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक, लखीसराय बाइपास रेल ओवरब्रिज का निर्माण कार्य 31 मार्च 2020 को पूरा हुआ था। इसके बाद कुछ ही वर्षों में गंभीर तकनीकी कमियां सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे।


इस परियोजना के निर्माण पर करीब 146.31 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी समाचार रिपोर्टों में दी गई है। इतनी बड़ी लागत वाली सार्वजनिक परियोजना में संरचनात्मक खामियां मिलने से यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों, तकनीकी परीक्षण और निगरानी की प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई थी।


हालांकि, किसी तकनीकी खामी के सामने आने मात्र से उसके कारण या किसी विशेष अधिकारी की जिम्मेदारी अपने आप तय नहीं हो जाती। इसके लिए निर्माण रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित तकनीकी दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।


कारण बताओ नोटिस के बाद 15 साल का प्रतिबंध


RTI के तहत प्राप्त विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य अभियंता (दक्षिण) ने 18 मई 2026 को निर्माण एजेंसी के खिलाफ ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की थी। इसके बाद विभाग ने 1 जून को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया।


निर्माण एजेंसी ने 8 जून को अपना जवाब प्रस्तुत किया। विभाग ने स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और 13 जून 2026 को बाबा हंस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 15 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट करने का आदेश जारी किया।


इस कार्रवाई का उद्देश्य निर्माण कार्य से जुड़ी जवाबदेही तय करना और सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता मानकों के पालन को सुनिश्चित करना है। हालांकि, ब्लैकलिस्टिंग के आदेश के साथ-साथ पुल की वास्तविक स्थिति और मरम्मत की प्रगति की जानकारी भी आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।


भारी वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता


पुल में गंभीर खामियां मिलने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की जानकारी पहले की समाचार रिपोर्टों में सामने आई थी। ऐसे कदमों का उद्देश्य पुल पर अतिरिक्त भार कम करना और संभावित जोखिम से बचाव करना है।


भारी वाहनों पर रोक से शहर के भीतर यातायात का दबाव बढ़ने और वैकल्पिक मार्गों पर परेशानी होने की आशंका भी रहती है। इसलिए प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी तरफ यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना।


अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पुल की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम किस चरण में है, उसे पूरा करने की समयसीमा क्या है और सामान्य यातायात बहाल करने से पहले किन तकनीकी मानकों की जांच की जाएगी।


केवल एजेंसी पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं, मरम्मत भी जरूरी


निर्माण एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई से जवाबदेही का संदेश जरूर जाता है, लेकिन इससे पुल की संरचनात्मक समस्याएं अपने आप समाप्त नहीं होंगी। जरूरी है कि विशेषज्ञों की निगरानी में सभी प्रभावित हिस्सों की जांच हो, मरम्मत का काम तकनीकी मानकों के अनुसार कराया जाए और सुरक्षा संबंधी परीक्षण के बाद ही यातायात व्यवस्था को लेकर निर्णय लिया जाए।


साथ ही, निर्माण के दौरान गुणवत्ता जांच, निरीक्षण और पर्यवेक्षण से संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा भी महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


लखीसराय बाइपास ROB का मामला अब केवल निर्माण एजेंसी पर हुई कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि पुल को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम कब तक उठाए जाते हैं।


यह भी पढ़ें: बिहार की सड़क, पुल और विकास परियोजनाओं से जुड़ी ताजा खबरों के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।

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